Monday 1 August 2011

ओ क्यां रो समाज है?
रीपियां रै खातिर खूंद काडै
भाई-भाई ने बाडै
ओ क्यां रौ समाज है?
नोट है तो भर्ती करवाओ
नीं तो मरीज नै घरै ली आओ
ओ क्यां रो इलाज है?
योजना शुरू होणै सूं पैली थमगी
दफ्तर रै कागदां में गमगी
ओ क्यां रो आगाज है?
खरीदण गया तो अंटी फाटगी
पोषाहार नै सूंडी चाटगी
ओ क्यां रो अनाज है?

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