Sunday, 20 June, 2010

बचपन की यादे भूले नहीं भूलती

व्यक्ति बड़ा हो कर ढेरो टेन्सेनेपल लेता है लकिन जब बचपन मैं होता है तो न कोई तेंसें होती है न कोई फ़िक्र मेरी नजर मैं बचपन ही वो अवस्था है

Tuesday, 8 June, 2010

सब है पता है ना माँ

मैं कभी बतलाता नहीं पर अँधेरे से डरता हू मैं माँ

यूं तो मैं दिखलाता नहीं तेरी पर्वहा करता हू मैं माँ

तुझे सब है पता हे न माँ -2

Tuesday, 1 June, 2010

सास बहु की जंग

सास - जब से टीवी घर में आया

तब से जगड़े मुफ्त में लाया

बहु - टीवी तो है अब आया

हंगामा तो पहले से छाया

सास - सारा दिन टीवी के आगे रहती है

खाने को कुछ है नहीं , बस आप ही खाती रहती है

बहु - मेरे ये ससुराल से आया

फिर तुमने क्यों अपने कमरे में रखवाया

बेटा और पति - कोई देखे खानी घर घर की कोई देखे आस्था

लड़ाई तुम करदो बंद इनसे मेरा क्या वास्ता

TUM देखते संस्कार, तुम देखते देखते कहता है दिल

कभी देखा तुमने ये बढ़ता बिजली का बिल

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